Ramayana In Hindi | रामायण से जुड़े 13 रहस्य जिनसे दुनिया अभी भी अनजान है

Ramayana In Hindi | रामायण से जुड़े 13 रहस्य जिनसे दुनिया अभी भी अनजान है

रामायण हिन्दू रघुवंश के राजा राम की गाथा है। । यह आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य, स्मृति का वह अंग है। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ भी कहा जाता है। रामायण के सात अध्याय हैं जो काण्ड के नाम से जाने जाते हैं, इसके 24,000 श्लोक हैं।

राम’ यह शब्द दिखने में जितना सुंदर है उससे कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण। राम कहने मात्र से शरीर और मन में अलग ही तरह की प्रतिक्रिया होती है जो हमें आत्मिक शांति देती है। हिन्दू धर्म के चार आधार स्तंभों में से एक है प्रभु श्रीराम। भगवान श्री राम ने एक आदर्श चरित्र प्रस्तुत कर समाज को एक सूत्र में बांधा था। भारत की आत्मा है प्रभु श्रीराम।

कुछ भारतीय कहते हैं कि यह 6०० ईपू से पहले लिखा गया। उसके पीछे युक्ति यह है कि महाभारत जो इसके पश्चात आया बौद्ध धर्म के बारे में मौन है यद्यपि उसमें जैन, शैव, पाशुपत आदि अन्य परम्पराओं का वर्णन है। अतः रामायण गौतम बुद्ध के काल के पूर्व का होना चाहिये। भाषा-शैली से भी यह पाणिनि के समय से पहले का होना चाहिये।

रामायण का समय त्रेतायुग का माना जाता है। हिन्दू कालगणना चतुर्युगी व्यवस्था पर आधारित है जिसके अनुसार समय अवधि को चार युगों में बाँटा गया है- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग एव कलियुग जिनकी प्रत्येक चतुर्युग (43,20,000 वर्ष) के बााद पुनरावृत्ति होती है। एक कलियुग 7,32,000 वर्ष का, द्वापर 4,7,000 वर्ष का, त्रेता युग 12,949,000 वर्ष का तथा सतयुग 14,26,000 वर्ष का होता है। इस गणना के अनुसार रामायण का समय न्यूनतम 6,000,000 वर्ष (वर्तमान कलियुग के 5,118 वर्ष +बीते द्वापर युग के 4,8,000 वर्ष) सिद्ध होता है।

हमने इसे टीवी पर देखा है, और फिर भी ऐसी चीजें हैं जो हम महाकाव्य के बारे में नहीं जानते हैं। आज हम आपको भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण के बारे में कुछ तथ्य बतायेंगे जो आपको जरूर पसंद आयेंगे।

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Ramayana In Hindi

Ramayana In Hindi

1. भगवान् राम भगवान् विष्णु के सातवें अवतार हैं।

2. राम नाम रघु राजवंश के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने दिया था।

3. राम का अवतार एक पूर्ण अवतार नहीं माना जाता है क्योंकि उनको 14 कलाएं ज्ञात थी।

4. भगवान राम को सुरक्षित रखने के लिए हनुमान ने सिंदूर से खुद को ढंक दिया। यही कारण है कि उन्हें बजरंग बाली कहा जाता है।

5. जब राम अवतार का प्रयोजन सिद्ध हो गया तब राम जी को किसी साधारण मनुष्य की तरह ही अपना शरीर त्यागना था . लेकिन उनके परम भक्त हनुमान के होते यमराज के लिए राम जी तक पहुंचना संभव नहीं था. इसलिए राम जी ने जमीन में पड़ी एक दरार से अपनी अंगूठी गिरा दी और हनुमान से उसे लाने के लिए कहा. हनुमान जी उसे खोजते-खोजते नाग लोक पहुँच गए और वहां के राजा से राम जी की अंगूठी के बारे में पूछा. तब राजा ने बताया कि राम जी ने ऐसा उनका ध्यान भटकाने के लिए किया है ताकि यमराज राम जी को ले जा सकें।

6. राम जी के अनुज लक्ष्मण सीता मैया और भगवान् राम की रक्षा करने के लिए 14 वर्ष के वनवास में एक भी दिन नहीं सोये थे. इसलिए उनका एक नाम गुडाकेश भी है।

7. रावण मायावी था उससे मुकाबला करने के लिए इंद्र देवता ने राम जी के लिए एक दिव्य रथ भेजा था. उसी रथ में बैठ कर राम ने रावण को परास्त किया था।

8. वनवास जाते समय भगवान् राम की आयु 27 वर्ष थी। Ramayana In Hindi

9.रामचरित मानस के अनुसार कि राम-रावण का युद्ध 32 दिन चला था जबकि दोनों सेनाओं के बीच 87 दिन तक युद्ध हुआ।

10.सीता ने अपने बचपन के दौरान भगवान शिव के धनुष को तोड़ दिया था। यही कारण है कि राजा जनक ने सीता के स्वयंसेवक पर धनुष को तोड़ने की शर्त रखी।

11. नंदी, बैल, ने रावण को शाप दिया था उन्होंने कहा था कि बंदरों आपके विनाश का कारण बन जाएंगे।

12. जब बंदर राम सेतु बना रहे थे, एक गिलहरी उन्हें मदद करने की कोशिश की। बंदर ने इसे मजाक किया, लेकिन भगवान राम अपने समर्पण से प्रभावित हुआ।

13. माना जाता है कि गिलहरी पर जो तीन धारियां हैं वह भगवान राम के आर्शीवाद के कारण हैं. दरअसल, जब लंका पर आक्रमण करने के लिए रामसेतु बनाया जा रहा था तब एक गिलहरी भी इस काम में मदद कर रही थी. उसके समर्पण भाव को देखकर श्रीराम ने प्रेमपूर्वक उसकी पीठ पर अपनी उँगलियाँ फेरी थीं और तभी से गिलहरी पर ये धारियां मौजूद है।

14. लंका पहुँचने के लिए समुन्द्र पर रामसेतु का निर्माण करने में सिर्फ 5 दिन लगे थे। Ramayana In Hindi

15. रावण खुद को अजेय समझता था लेकिन एक बार राजा अनरण्य ने उसे शाप दिया कि उनके वंश से उत्पन्न युवक ही उसकी मृत्यु का का कारण बनेगा. श्री राम राजा अनरण्य के वंश में ही जन्मे थे।

16. रामजी के धनुष का नाम कोदंड था। Ramayana In Hindi

17. भगवान् विष्णु के 1000 नामों में राम नाम 394 नम्बर पर दर्ज है।

18. भगवान् विष्णु के अवतार परशुराम ये नहीं जानते थे कि श्री राम भी विष्णु-अवतार हैं. इसलिए उन्होंने राम जी को विष्णु जी के धनुष पे प्रत्यंचा चढाने को कहा, जिसे राम जी ने आसानी से चढ़ा दिया और परशुराम जी भी राम जी के असली स्वरुप को जान गए।

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19. रावण अपने समय का सबसे बड़ा ज्ञानी था, इसीलिए एक बार राम जी ने रावण को महा-ब्राह्मण कह कर पुकारा था, और उसकी मृत्यु के समय लक्षमण को उससे ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेजा था।

20. लंका पर चढ़ाई करने से पहले श्रीराम ने रामेश्वरम में शिव लिंग बना कर शिव अराधना की थी. आज भी रामेश्वरम हिन्दुओं के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

21. सीता जी के स्वयंवर में राम जी ने शिव जी के जिस धनुष को तोड़ा था उसका नाम पिनाक था।

22. जिस जंगल में भगवान् राम, सीता मैया और लक्षमण जी ने वनवास काटा था उस जंगल का नाम दंडकारण्य था।

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आखिर क्यों ? राम ने लक्ष्मण को मृत्युदंड दिया

रामायण में वर्णित है कि श्री राम ने न चाहते हुए भी जान से प्यारे अपने छोटे भाई लक्ष्मण को मृत्युदंड दिया थाl आखिर क्यों भगवान राम ने लक्ष्मण को मृत्युदंड दिया था? यह घटना उस वक़्त की है जब श्री राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौट आये थे और अयोध्या के राजा बन गए थेl एक दिन यम देवता कोई महत्तवपूर्ण चर्चा करने के लिए श्री राम के पास आते हैंl चर्चा प्रारम्भ करने से पूर्व उन्होंने भगवान राम से कहा की आप मुझे वचन दें कि जब तक मेरे और आपके बीच वार्तालाप होगी हमारे बीच कोई नहीं आएगा और जो आएगा, उसे आप मृत्युदंड देंगेंl इसके बाद राम, लक्ष्मण को यह कहते हुए द्वारपाल नियुक्त कर देते हैं कि जब तक उनकी और यम की बात हो रही है वो किसी को भी अंदर न आने दे, अन्यथा वह उसे मृत्युदंड दे देंगेl

लक्ष्मण भाई की आज्ञा मानकर द्वारपाल बनकर खड़े हो जाते हैंl लक्ष्मण को द्वारपाल बने कुछ ही समय बीतने के बाद वहां पर ऋषि दुर्वासा का आगमन होता हैl जब दुर्वासा ने लक्ष्मण से अपने आगमन के बारे में राम को जानकारी देने के लिये कहा तो लक्ष्मण ने विनम्रता के साथ मना कर दियाl इस पर दुर्वासा क्रोधित हो गये तथा उन्होने सम्पूर्ण अयोध्या को श्राप देने की बात कहीl लक्ष्मण ने शीघ्र ही यह निश्चय कर लिया कि उनको स्वयं का बलिदान देना होगा ताकि वो नगरवासियों को ऋषि के श्राप से बचा सकें और उन्होने भीतर जाकर ऋषि दुर्वासा के आगमन की सूचना दी।  Ramayana In Hindi

अब श्री राम दुविधा में पड़ गए क्योंकि उन्हें अपने वचन के अनुसार लक्ष्मण को मृत्युदंड देना थाl इस दुविधा की स्थिति में श्री राम ने अपने गुरू वशिष्ठ का स्मरण किया और कोई रास्ता दिखाने को कहाl गुरूदेव ने कहा कि अपनी किसी प्रिय वस्तु का त्याग, उसकी मृत्यु के समान ही हैl अतः तुम अपने वचन का पालन करने के लिए लक्ष्मण का त्याग कर दोl लेकिन जैसे ही लक्ष्मण ने यह सुना तो उन्होंने राम से कहा की आप भूल कर भी मेरा त्याग नहीं करना, आप से दूर रहने से तो यह अच्छा है की मैं आपके वचन का पालन करते हुए मृत्यु को गले लगा लूँl ऐसा कहकर लक्ष्मण ने जल समाधि ले ली। Ramayana In Hindi

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