PV Sindhu Biography |Hindi| Badminton

PV Sindhu Biography |Hindi| Badminton

कसी ने क्या खूब कहा है, यू ही नहीं मिलती किसी राही को मंजिल एक जूनून सा दिल में जगाना होता है पूछा चिड़िया से कैसे बनाया आसियाना  बोली भरनी पड़ती है उड़ान बार बार तिनका तिनका उठाना पड़ता है।  ये कहावत हमारी गोल्डन गर्ल P.V. Sindhu पे सटीक बैठती है, PV Sindhu ने भी अपनी जिंदिगी में उड़ान भरी।

PV Sindhu Biography

कैसे लगातार 4 साल फाइनल में पहुंच कर उन्होंने आखिर में जीत हासिल कर ही ली है और इतनी कम उम्र में भारत देश का नाम रोशन किया।  हाल में ही हुए world badminton championship  में गोल्ड मैडल जीत कर भारत देश का झंडा सबसे ऊपर लहरा दिया है।  इंटरनेशनल लेवल पर धूम मचाने वाली बैडमिंटन (badminton) प्लेयर PV Sindhu ने 25 अगस्त 2019 को इतिहास रच दिया।  आज के इस आर्टिकल में PV Sindhu की लाइफ स्टोरी जानेंगे तो चलिए शुरू करते है।

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इस कहानी की शुरुआत होती है 5 जुलाई 1995 को जब तेलंगाना के हैदराबाद में PV Sindhu  का जन्म हुआ।  PV Sindhu  का पूरा नाम Pusarla Venkata Sindhu है, इनके पिता का नाम PV Ramana और उनकी माता का नाम P. Vijaya है।  सिंधु के माता- पिता दोनों ही स्पोर्ट्स से जुड़े हुए थे और दोनों ही वॉलीबाल के खिलाड़ी रह चुके है। 

उनके पिता को साल 2000 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चूका है। PV Sindhu ने अपना करियर वॉलीबाल से हटकर बैडमिंटन (badminton) को चुना उनके पिता को साल 2000 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित भी किया जा चूका है।  ने अपना करियर वॉलीबाल से हटकर बैडमिंटन को चुना. उनकी एक बड़ी बहिन भी है जिनका नाम P. V. Divya है जो की पेशे से डॉक्टर है। 

8 वर्ष की उम्र में ही `सिंधु decide कर लिया था की वो बैडमिंटन (badminton) में अपना करियर बनेयेंगी। उनके माता-पिता sports person थे इसलिए कभी भी अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए force नहीं किया इसी वजह से वो हमेशा अपने खेल में अपना 100% दे पाई। वो शुरू से ही Pullela Gopichand से बहुत inspire थी।  Pullela Gopichand ने 2001 में the all england championships जीता था। Pullela Gopichand भी हैदराबाद के रहने वाले थे। वही आगे चलकर  सिंधु के कोच बने।

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 2004 में अपने आइडियल  Pullela Gopichand से ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया, उन्होंने ही सिंधु को बैडमिंटन (badminton) में महारथ हासिल की। सिंधु के घर और अकादमी में 56 किलोमीटर का फासला था लेकिन सुबह 4 बजे उठकर प्रैक्टिस के लिए अकादमी पहुंच जाती थी।  उनमें अपने खेल को लेकर एक जूनून सा था। सिंधु ने एक इंटरव्यू में बतया की उनके कोच गोपीचंद ने उन्हें 21 साल की उम्र में फ़ोन इस्तेमाल करने को मना कर दिया क्यूंकि फ़ोन उनके खेल में  डिस्ट्रक्शन बन रहा था फिर सिंधु ने पुरे 8 महीनों तक फ़ोन को हाथ तक नहीं लगाया इस बात से आप उनके खेल को लेकर दीवानगी का पता लगा ही सकते है।

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साल 2013 में सिंधु ने अपनी पहली उचाईयों की सीढ़ी चढ़ी जब उन्होंने World Championship में World Badminton में अपनी पहचान बनाई और पहली बार सीनियर लेवल पर ब्रोंज मैडल हासिल किया उसके बाद 2016 के Rio olympics में सिल्वर मैडल जीत कर पुरे विश्व में नाम कमाया। सिंधु ने Rio Olympics के बाद कुल 16 मैच में भाग लिया जिसमे हर बार फाइनल तक गई लेकिन 5 ही बार फाइनल जीत पाई।  PV Sindhu ने दुनिया को दिखा दिया  कोशिश करने वालों की हार नहीं होती है। साल 2017 में World Badminton Championship के फाइनल में पहुँचने के बाद चूक गयी  लेकिन सिंधु ने हार नहीं मानी और फिर से कोशिश करना शुरू किया और आगे चलकर इस मुकाम को हासिल करने में सफल रही।

 उन्होंने  World Badminton Championship में  36 मिनट में मुकाबले को अपने नाम कर लिया उनकी हर service के आगे जापान की खिलाड़ी ने खुद को बेबस पाया और सिंधु मुकाबले को जीत गयी। world badminton championship जितने वाली वो पहली भारतीय महिला बनी।  PV Sindhu को बेहतरीन बैडमिंटन (badminton) खेलने के लिए बहुत सारे अवार्ड मिले 2013 में अर्जुन अवार्ड, 2014 में FICCI Sports person of the year, 2015 में पद्मश्री   और 2016 में राजीव गाँधी खेल रत्न से सम्मानित किया गया है।

PV Sindhu से हम सभी को प्रेरणा लेने की जरुरत है की किस तरह से हरने के बाद भी वो रुकी नहीं और आगे बढ़ती रही और अपना नाम, भारत का नाम पुरे विश्व में रेशन किया।  अंत में यही कहना चाहूँगा PV Sindhu ऐसे ही हमारे देश का नाम रोशन करती रहे और नई उचाई को छूती रहे।

उम्मीद करते है PV Sindhu की यह लाइफ स्टोरी जरूर आपको पसंद आई होगी आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यबाद मिलते है जल्द एक नई लाइफ स्टोरी के साथ।

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