ISRO की कामयाबी जिन पर हर भारतीय को गर्व है|Chandrayaan 2 Moon Mission

ISRO 

दोस्तों भारतीय Space Agency ISRO ने ना  जाने कितनी बार भारतीय होने का गर्व कराया है। दोस्तों सालों  की कड़ी मेहनत के बाद से भारत अंतरिक्ष की दुनिया में भी एक के बाद एक नई उचाईयो को छू रहा है।  साइकिल से शुरू हुआ यह सफर अब चाँद पर जा पहुँचा है। हमारे भारतीय वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे नामुकमकिन  मिशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिए है जिसे दुनिया कोई और देश करने को तो छोड़िये सोच भी नहीं सकता।

इसी कड़ी में चंद्रयान 2 मिशन  (Chandrayaan 2) भी आज कल बहुत चर्चे में है जिसके जरिए सबसे काम बजट के अंदर भारत दूसरी बार चाँद के ऑर्बिट में और पहली बार चाँद के सतह पर अपना यान उतारेगा।

यही वजह है की भारत की Space Organization ISRO को कौन नहीं जनता क्यूंकि अगर सब से काम बजट के अंदर किसी मिशन को सफलता पूर्वक अंजाम देना है तो यह कारनामा सिर्फ भारतीय वैज्ञानिक ही कर सकते है और दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम भारत के space agency ISRO के उन सफलता के बारे में बात करेंगे जिसे जान कर हर भारतीय को गर्व महसूस होगा।

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ISRO 

ISRO की स्थापना भारत के महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने स्वतंत्रा दिवस के मौके पर 1969 में की थी। यही वजह है की उन्हें Father OF India’s Space Programme भी कहा जाता है। लेकिन दोस्तों आपको यह बात जानकर हैरानी हो जिस Indian Agency का लोहा पूरी दुनिया मानती है उसी एजेंसी ने अपना पहला राकेट साइकिल पर लाया था और जब भारत के पास राकेट को लांच करने के लिए लॉन्चिंग पैड नहीं था तब नारियल  के पेड़ों को लॉन्चिंग पैड की तरह इस्तेमाल किया गया।

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साइकिल के बाद से जब दूसरी बार राकेट को लॉन्चिंग पैड तक पहुँचाने की बात आई  तब साइकिल तो नहीं बैल गाड़ी का इस्तेमाल हुआ, आप इन सभी बातो से अंदाजा लगा सकते है की भारतीय वैज्ञानिकों ने किस तरह से भारतीय space agency की शुरुआत की।  इसके अलवा भारतीय रिसर्च एजेंसी को आज उन 6 देशों की एजेंसी में शामिल किया जाता है जिसके पास खुद के दम पर सॅटॅलाइट बनाने और लांच करने की छमता है।

इसके अलवा 5 देश है अमेरिका, रूस, फ्रांस , जापान और चीन और दोस्तों भारत ISRO के जरिए अपने पहले प्रयास में मंगल ग्रह पर पहुँचने वाला एकमात्र देश है क्यूंकि अमेरिका, रूस, चीन जैसे कई सारे देश अपने पहले प्रयास में असफल रहे थे।

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एक दिलचस्प बात यह है की किसी और देश की संघठन की अपेक्षा ISRO  में सबसे ज्यादा सिंगल वैज्ञानिक है मतलब की विज्ञान की दुनिया में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए बहुत सारे लोग ने शादी ही नहीं की। 

भारत ने फरवरी 2017 में PSLV C37 की मदद से 104 सॅटॅलाइट को लांच करके  इतिहास रच दिया क्यूंकि इससे पहले तक रूस ने 37 सॅटॅलाइट लांच करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। रूस की 37 और भारत की 104  का अंतर तो आप समझ रहे होंगे कितना बड़ा अंतर है।

चाँद पे जाने का मिशन चंद्रयान 2 जो की आज कल बहुत चर्चे में है यह दूसरी बार होगा जब भारत चाँद की ओर भाड़ रहा है।  क्यूंकि इससे पहले 2008 में भी भारत का चंद्रयान 1 मिशन सफल हो गया है, इसी मिशन के जरिए ही भारत ने चाँद पर पानी होने का सबूत पूरी दुनिया को दिया था।

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 एक बार फिर से हमारे वैज्ञानिक की कड़ी मेहनत की वजह से ही चंद्रयान 2 मिशन के जरिए चाँद की और एक और कदम बढ़ा रहे है।  इस बार ना केवल ऑर्बिटर चाँद तक भेजा जायेगा बल्कि लैंडर के जरिए  सॉफ्ट लैंडिंग करते हुए उसमे से एक रोवर भी  निकलेगा जो की चाँद की सतह पर घूम घूम कर इनफार्मेशन कलेक्ट करेगा ।

अंत में बस यही कहना चाहता हूँ भारत के वैज्ञानिकों ने जिस तरह से दिन रत एक करके कड़ी मेहनत से एक के बाद एक बड़े-बड़े मिशन को अंजाम दिया है  वह सच में कबीले तारीफ है और  अपने ISRO पे गर्व होना चाहिए।  उम्मीद करते है आपको ISRO के बारे में जान कर बहुत अच्छा लगा होगा, आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।

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